नई सुबह।

नई सुबह को बेताब आज हर चेहरा तो है, समय निकल रहा लेकिन वक्त ठहरा तो हैं,

उठने को बेताब है कदम हमारे लेकिन, कुछ छुपा हुआ सा डर का पहरा तो है ,

रात गहरी है तो सुबह नजदीक ही होगी, इंतजार की घड़ियां खत्म होने को होगी,

कुछ सब्र और रख लेना मेरे यारों, महफीले भी होगी और जिंदगी की रफ्तार भी होगी ।

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