मंजिले।

बड़ा थकाती है और बहुत रूलाती है मंजिले, खून पसीना भी बड़ा बहाती है मंजिले , रास्ते कांटो से भरे होते है, घाट घाट की सैर कराती है मंजिले।

रातों को नींदे उड़ाती है , दिन मे ये ख्वाब दिखाती है , हस्ते हुए को रूलाती है , रोते को भी ये हसाती है।

जीने कि ये राह भी है, और चलने का तरीका भी , यही तेरी मुस्कान भी है और यही सलीका भी । ख्वाब ही है तेरे जो जीने कि उम्मीद है , ख्वाब ही खुशियां है , ख्वाब ही हर फसाद है।

ज़िंदगी रास्तों पे है , और मंजिले ख़्वाबों मे, ना अंत रास्तों का है ना अंत ख़्वाबों का, जितना जिये वो तेरी हिम्मत और जितना चले वो तेरी किस्मत।

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