दोस्त मेरे कुछ कम ही होते है

दोस्त मेरे कुछ कम ही होते है, बातो के सिलसिले भी कम ही होते है। बातो से दिल जीतने का हुनर मुझे आता नहीं, बातो बातो मे फसाने कुछ कम ही होते है।

कुछ बचपन के यार, कुछ जवानी के दिलदार , इक नादान सा इश्क और बचपने हजार , इतना ही जहां मेरा बस इतना सा है संसार।

दुनियादारी से फासला तय ही होता है अपना, शायद इसीलिए सैकड़ों झूठे अपनों से चंद सच्चे बेगाने यार रखता हूं। कुछ फ़िज़ूल ताने अनसुने करता हूं और सपने हजार रखता हूं।

2 thoughts on “दोस्त मेरे कुछ कम ही होते है

Leave a Reply

Your email address will not be published.