बेवजह

जी ले जिंदगी बेवजह, एक बात तेरा साथ बेवजह,

थोड़ा लड़ थोड़ा मुस्कुरा ,ले हाथों में एक हाथ बेवजह ।

गम है तो खुशियां भी होंगी, मर्ज है तो दवाऐ भी होंगी,

तू ना कर फिकर , कभी जी ले इस कदर बेवजह।

माना कि तुझे काम बहुत है, जिंदगी में ना आराम बहुत है।

माना तेरे अरमान बहुत है, और बड़ा यह आसमान बहुत है,

फिर भी कभी उड़ते उड़ते थक जाए, पेड़ों की यहां छांव बहुत है ।

रुक जाना कभी यूं ही बेवजह, लेना सुकून के चंद लम्हे गुजार ,

कितना भी उड़ता रहे तो, खत्म ना होने वाला आसमान बहुत है।

कभी बचपन में जा, कभी पानी में नाव चला ,

कभी पकड़ उन तितलियों को , कभी कोई गीत गा ।

कभी जी ले कुछ पल ऐसे भी, सुना है यह जिंदगी बदनाम बहुत है।

3 thoughts on “बेवजह

Leave a Reply

Your email address will not be published.